हम कहां जाना चाहते है?
हम अभी भी नहीं जानते,
हम तो बस विरोध करते रहते हैं
हमारे नारे लग रहे हैं
हमें नहीं पता कौन सुनेगा
क्या कोई बदलाव होगा
हमें पता नहीं
हम नहीं जानते
बस सड़कों पर घूमते और चलते हुए, हम विरोध में हाथ उठाते हैं
कुछ लोग हमें गाली देंगे,
कुछ हमें ताना मारेंगे ,
हमारे लाल झंडे पर ताने कसेंगे,
हम हर सड़क पर सिग्नल तोड़ते हैं,
कुछ लोग चिल्लाएँगे ,
कुछ हार्न बजाएँगे ,
फिर भी हम बिना किसी डर के आगे बढ़ते रहेंगे।’
ताकि दुनिया समझे
हम जीवित हैं,
हमारे पास भी एक जगह है
हम सांस ले रहे हैं
हम विरोध करना नहीं भूले हैं.
हमारी कोई हस्ती है!!
इस ग्रह पर हमारा भी एक स्थान है
हम आजादी की सांस लेते हैं
हम सड़क पर चलने वाले लोग
हमारी आत्माएँ मुक्त हो गई हैं
आने वाली पीढ़ियाँ विश्वास करें
एक दिन हम अपनी सच्ची आज़ादी का जश्न मनाएँगे
और इसका जश्न मनाया जाना चाहिए!!

One Week in Nepal
It was almost 11 a.m. on September 7 when we reached the India–Nepal border. It was the first time I was crossing from India into









